Wednesday, March 13, 2013





"रिश्ते".........एक नाज़ुक सा रेशमी ख़याल


              रिश्ते तोड़ने से अच्छा रिश्ता जोड़ना है 
रहीम जी ने भी कहा है :

 रहिमन धागा प्रेम को , मत तोडो चटकाय |
 टूटे से फिर न जुड़े, जुड़े तो गांठ पड़ी जाये || 


    यदि आप स्वास्थय रहना चाहते हैं  तो यह जरुरी है की आपके रिश्तेदार और मित्र  बने रहे अगर किसी कारन से रिश्तो में दरार आई है तो बेहतर होगा की कोई और गलत फहमी पलने से पहले ही  एक कोशिश कीजिए। आपसी सहमति से, बिना किसी पूर्वाग्रह के, एक-दूसरे को अपनी आपत्ति कह डालें। इस दौरान उत्तेजित नहीं होना है। जब एक अपनी बात कहे तो दूसरा चुपचाप ध्यान से सुने। यह भी ध्यान रखें कि आप संधिवार्ता के‍ लिए बैठे हैं। 

    आपके द्वारा पूर्व में किए गए अहसानों/सहयोगों/सहायता का जिक्र कदापि न करें बल्कि उसके द्वारा किए गए सहयोगों/सहायता/अहसानों का मन ही मन स्मरण करें। ज्यादा नहीं, पन्द्रह -बीस मिनट की यह संधि-बैठक आपके टूट रहे रिश्ते को न केवल प्रगाढ़ता से जोड़ेगी बल्कि कई तरह के सतत चल रहे वैचारिक झंझावातों यानी तनावों से आपको एक पल में मुक्त कर देगी।
रिश्ते जोड़ने के नौ सूत्र 

* रिश्ते में आई खटास के कारण को ढूँढना।
* शत्रुता का भाव मन में न फटकने दें।
* मन में उन मधुर क्षणों को याद करना, जो उस मित्र के कारण जीवन में आए थे।

* बातचीत के लिए स्वयं को मन से तैयार करना। 
* शांत रहें। 
* संवाद का अर्थ है परस्पर बातचीत, इसे एकतरफा न रहने दें। 
* बिना उत्तेजित हुए बात सुनना और कहना।
* समझौता करने का भाव मन में अवश्य रहे। सोचिए, आप ऑफिसमें 6 से 10-12 घंटे समझौतों के चलते ही तो पूरे कौशल और सामर्थ्य के साथ काम कर पाते हैं या घर पर अपनी कामवाली महिलाओं से कितने समझौते करते हैं।
* परस्पर अच्छे संबंधों के लाभों के अलावा यह भी ध्यान में रखें कि आप एक लगातार चलने वाले ऐसे तनाव से मुक्त होने वाले हैं, जो अवसाद, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदयरोग और निराशा को जन्म देने वाला है।

    तलाक से पहले पति-पत्नी भी इन सूत्रों को आजमा सकते हैं। और यदि आप रिश्ते निभाना सीख गए तो आप जीवन के हर पल में अपने दोस्तों और माता पिता, बहन, जीवनसाथी आदि संबंधो से हमेशा प्यार और खुशी पाते और देते रहेंगे | हिंदू धर्म में विवाह वन्धन पूर्व जन्मो का बंधन है जिसे तोड़ने के लिए तलाक जैसे शब्दों का कोई स्थान नहीं है या कहे की विवाह वो बंधन है जिसे तोडा नहीं जा सकता बल्कि निभाया जाना चाहिए |