Tuesday, June 20, 2017

तू थोड़ी देर और ठहर जा

दिल चरखे की इक तू डोरी
सूफ़ी इसका रंग हाए

इसमे जो तेरा ख्वाब पिरोया
नींदें बनी पतंग

दिल भरता नहीं
आँखें राज्जती नहीं
दिल भरता नही
आँखें राज्जती नही
चाहे कितना भी देखती जौन
वक़्त जाए मैं रोक ना पऔन

तू थोड़ी देर और ठहर जा सोणेया
तू थोड़ी देर और ठहर जेया

तू थोड़ी देर और ठहर जा ज़ालिमा
तू थोरी देर और ठहर जेया

#हाए दिन तेरे बिन अब जी ना पाए
दिन तेरे बिन अब जी ना पाए
साँस ना लेती रात
इश्क़ करें तेरे होंठों से
इश्क़ करें मेरे होंठों से
बस इक तेरी बात

तेरी दूरी ना साहूं
डोर खुद से रहूं

तेरे पहलू में ही रह जौन
तू ही समझा जो मैं चाहूं


तू थोड़ी देर और ठहर जा सोणेया
तू थोड़ी देर और ठहर जेया

तू थोड़ी दायर और ठहर जा ज़ालिमा
तू थोड़ी दायर और ठहर जेया

नायो लगना, नायो लगना
तेरे बिन दिल मेरा

दिल मिन्नटे करे
ना तू जेया ना परे

तेरे जाने से जी ना पऔन

तू थोड़ी दायर और ठहर जा सोणेया
तू थोड़ी दायर और ठहर जेया

तू थोड़ी देर और ठहर जा ज़ालिमा
तू थोड़ी देर और ठहर जेया

तू थोड़ी देर और ठहर जा ज़ालिमा
तू थोड़ी देर और ठहर जा.. (ठहर जा)

तू थोड़ी देर और ठहर जा ज़ालिमा
तू थोड़ी देर और ठहर जा
तू थोड़ी देर..

बस थोड़ी देर और ठहर जा

यादें

याद रखते है हम उन्हें आज भी #पहले की तरह,
कौन कहता है की फांसले #मोहब्बत की यादें मिटा देते है ...★R