Wednesday, July 12, 2017

उनका खयाल

एक शीतल हवा  के झोंके संग तेरा ख्याल आना,
और दूसरे ही पल  तुझे मेरे लफ़्ज़ों के बीच पाना....

महज़ इत्तिफ़ाक़  है या रूह की रूह को आवाज़,
हवा सी मोहब्बत  है तेरी या मेरा तुझमे विश्वास....

मुझे पढ़ के  भी तेरी चुप्पियों को फर्क नही पड़ता,
या दिल तेरा मेरी इन व्यर्थ की बातों  पे है हँसता...

जिन बातों पे हम हँसते थे उन्हें  सोच के रोना आया ,
कभी हँसेंगे उन्ही बातो पर जिन बातों ने था रुलाया...

तूमने ख्वाबों में आकर मेरे दिल मे  जो इश्क़ बोया था,
पिछले  कुछ दिनों से वो रूह में छिपके कँही सोया था

आज सावन की बूंदों ने उसे  भी स्पर्श से जगा दिया ,
मेरी कलम ने  तेरी यादों से ही स्याही का काम लिया..

अहसासों  की नमी से रिश्ते उपजते है फूल भी आते हैं
खुश्बू फैलाते  हैं खुद मुरझा के  काँटो को छोड़ जाते है..

काँटों  की फितरत है सदा जो हैं वही दिखते है,
दामन पकड़ के मेरा  रुकने को भी ये कहते हैं... !!

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