Thursday, May 18, 2017

याद आया





दिल धड़कने का सबब याद आया
वो तेरी याद  थी अब याद आया !

आज मुश्किल था सम्भलना ऐ दोस्त
तू मुसीबत में अजब  याद आया !

दिन गुज़ारा  था बड़ी मुश्किल से
फिर तेरा  वादा-ए-शब याद आया !

तेरा भूला हुआ पैमान-ए-वफ़ा
मर रहेंगे अगर अब याद आया !

फिर कई लोग  नज़र से गुज़रे
फिर कोई शहर-ए-तरब याद आया !

हाल-ए-दिल हम भी सुनाते लेकिन
जब वो रुख़सत हुए तब याद आया !

बैठ कर साया-ए-गुल में "नासिर"
हम बहुत रोये वो जब याद आया !!



No comments:

Post a Comment