Wednesday, May 17, 2017

सफर


                 
                 
तन्हाई भरा ये सफर यूँ कटता नहीं, 
तेरे सिवा दिल कहीं लगता भी नहीं।

गुज़र रहा हूँ फिर तेरे शहर के करीब से,
महसूस किया तुझे इन हवाओ की लहरों से, 

 छू गया हो तेरा अहसास मेरे दिल को करीब से,
लो फिर आज खो गया हूँ तेरी यादो को समेट के।

रिमझिम गिरती बारिश ने भी तन को मेरे छू लिया, 
लगा जैसे शायद तूने भी मुझे दिल से याद किया, 

भीगना भी मन को बहुत भा रहा था,
पल पल तेरा स्पर्स याद जो आ रहा था।

जो आँखे बंद की तू दिल के करीब मेरे थी, 
आँख खुलते ही सपनो की तरह ओझल थी। 

प्यार का अहसास भी बड़ा खूबसूरत है,
रूह थम चुकी , जिस्म चलते जा रहा है

आस थी दीदार ए यार की जो अधूरी रही, 
दिल बेकरार रहेगा जब तक हसरत पूरी नही हो रही। 

इतना क्यों याद आती हो के जान पे बन आये, 
आ भी जाओ न तरसाओ ...... बस मिलने चली आओ। 
  ®

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